विकास

यह विकास कैसा है ?
कम्बख्त सोने नहीं देता।
जिन्दगी को यूँ दौड़ाता है,
कि ठहराव होने नहीं देता।।

यह विकास कैसा है?
प्रदूषण बहुत करता है।
हवा-पानी को साफ,
होने नहीं देता।।

यह विकास कैसा है?
दुनिया को जोड़़ता है।
मगर दिलों को एक,
होने नहीं देता।।

यह विकास कैसा है?
संवेदनाएं क्षीण करके।
मशीन बना देता है,
इन्सान होने नहीं देता।

यह विकास कैसा है?
सपने तो देता है मगर।
उन्हें संजोने नहीं देता।।

यह विकास कैसा है?
अमीर होने नहीं देता।
जमीन पर सोते थे, खाट मिल गई,
उसपर भी सोने नहीं देता।।

यह विकास कैसा है?
फेसबुक पर हजारों बातें होती हैं।
पास-पास बैठे हैं मगर,
बात होने नहीं देता।।

यह विकास कैसा है?
कम्बख्त सोने नहीं देता।
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गोपाल शर्मा
जय मार्कीट, कांगड़ा
हि.प्र.।