2122 1122 1122 22/112
थाम ले हाथ मेरा आज सवँर जाने दे
अपने बाहों में मुझे आज बिखर जाने दे

आग जो दिल में मुहब्बत कि लगी है मेरे
अपने दिल मे तू उसे आज उत्तर जाने दे

ओढ़ कर अपने लिहाफो में मुझे ऐ हमदम
पहलू में अपने मुझे आज ठहर जाने दे

माँग के लाये हैं हम चन्द मिलन की घड़ियाँ
सुन ले पुकार मेरी आज उमर जाने दे

हम छुपा लेंगे नशेमन में बसा कर तुम्हे
साथ इक पल तो जरा अपने गुजर जाने दे
( लक्ष्मण दावानी ✍ )

2122 1212 22
करते हो क्यूँ गुमान किस्तों में
ले डूबेगी ये शान किश्तों में

चल बचाके तु अपने दामन को
उड़ न ऊँची उड़ान किश्तों में

गैर समझूँ किसे , किसे बैरी
करते हैं सब बखान किश्तों में

ज़िन्दगी लौट आएगी फिर से
कर के तो देख दान किश्तों में

ज़ख्म भर जाएंगे सभी दिलके
रौक दिल के उफान किश्तों में

खोजती हैं निगाहें जो चहरा
हो रहा उसका भान किश्तों में
( लक्ष्मण दावानी ✍ )