तमन्नाओं में जिये जाते हैं

गले मिलते हैं हाथ मिलाते हैं।
लोग मुहब्बत कितना जताते हैं।।

ब-मुश्किल पहचान हो जाती है।
चेहरे पर कितने चेहरे लगाते हैं।।

देखता हूं जब भी मुस्कुराते हैं।
हिज्र पर वो जशन सा मनाते हैं।।

अहसासों के पाॅव होते हैं कहाॅ।
रूह तलक़ मगर ये उतर जाते हैं।।

फ़िर तमन्नाओं ने घेरा है अनिल।
बस यूं तमन्नाओं में जिये जाते हैं।।

पंडित अनिल
अहमदनगर , महाराष्ट्र
📞 8968361211

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