गीत

मैं तेरे लिये बस जिया करुँ
रस नाम का तेरे पिया करुँ

मुश्किल में है जीना मरना सही
तुझे कह सकूँ कुछ डरना सही
सब तेरे लिये कर गुजरुं मैं
दोजख में बेशक उतरना सही
दुनियाँ से अब क्या लेना मुझे
मैं बस नाम तेरा लिया करुँ
मैं देख के तुझको जिया करुँ
रस नाम का तेरे पिया करुँ

जब हवा चले तो धूल उड़े
जिन्दगी उलझन में आन पड़े
औरों संग तो मैं लड़ा बहुत
अपने आप से कौन लड़े
किसी को कुछ न कह सकूँ
बस होंठ अपने सिया करुँ
मैं देख के तुझको जिया करुँ
रस नाम का तेरे पिया करुँ

आ जाओ मेरी राहों में
बस जाओ मेरी निगाहों में
छोड़ त़ुझे अब जाऊँ कहां
खो गया हूँ तेरी चाहों में
अच्छा लगे न जीना मुझे
बस तेरे लिये ही जिया करुँ
मैं देख के तुझको जिया करुँ
रस नाम का तेरे पिया करुँ

सुरेश भारद्वाज निराश
लोअर बड़ोल, धर्मशाला
पीओ दाड़ी 176057
मो० 9805385225

काव्य महक में आज की खूबसूरत रचनाएँ


ऑनलाइन ई पत्रिका भारत का खजाना में पेश है काव्य महक की खूबसूरत रचनाएँ। आज के रचनाकार हैं
श्री रमेश चन्द्र मस्ताना जी
डॉ सुलक्षणा जी
श्री राजेश पुरोहित जी।

काव्य महक की शानदार कविताएं पढ़िए


भारत का खजाना देश की सबसे बड़ी ऑनलाइन पत्रिका लेकर आए हैं “काव्य महक” का प्रथम अंक
रचनाकार हैं
डॉ प्रत्युष गुलेरी
श्री अशोक दर्द
पंडित अनिल
डॉ कुशल कटोच
श्री विजय भरत दीक्षित
पढिये और शेयर करिये।।।