कविता ने तुम्हारा कितना ख़्याल रक्खा है
कि हर एक शब्द को सँभाल रक्खा है

स्वर उठे तो नाज़ बने,व्यंजन उठे तो नखरे
हर वर्तनी को करीने से देख-भाल रक्खा है

हर मिसरे में घुल जाता है लावण्य तुम्हारा
हर्फ़ों में छुपा मतलब क्या कमाल रक्खा है

जो जवाब निकल के आए दिल से तुम्हारे
मैंने खोज-खोज के वही सवाल रक्खा है

क्या अलंकार,क्या रस और क्या श्रृंगार
हुश्न के हर सलीके को निकाल रक्खा है

सलिल सरोज
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मुझे संभालो कि मुझे गुमाँ हो गया
मैं किसी चाँद का आसमाँ हो गया

कितना सच्चा है प्यार मेरा देखिए
मैं किसी बच्चे की ज़ुबान हो गया

इश्क़ मेरा जज़बात से महरुम नहीं
मैं किसी बेघर का मकान हो गया

मेरे इश्क़ पे सियासत की छींटें नहीं
मैं होली तो कभी रमज़ान हो गया

मेरा इश्क़ गुज़र चुका है हर दौर से
मैं सदियों से खड़ा हिंदोस्ताँ हो गया

सलिल सरोज

उपरोक्त रचना मेरी स्वरचित और मौलिक है।

नाम:सलिल सरोज
पता: बी 302, तीसरी मंजिल
सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट्स
मुखर्जी नगर
नई दिल्ली-110009
उम्र:31 वर्ष
शिक्षा: सैनिक स्कूल तिलैया,कोडरमा,झारखण्ड से 10वी और 12वी उतीर्ण। 12वी में स्कूल का बायोलॉजी का सर्वाधिक अंक 95/100
जी डी कॉलेज,बेगूसराय,बिहार से इग्नू से अंग्रेजी में स्नातक एवं केंद्र टॉपर, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय ,नई दिल्ली से रूसी भाषा में स्नातक और तुर्की भाषा में एक साल का कोर्स और तुर्की जाने का छात्रवृति अर्जित। जीजस एन्ड मेरी कॉलेज,चाणक्यपुरी,नई दिल्ली इग्नोउ से समाजशास्त्र में परास्नातक एवं नेट की परीक्षा पास।
व्यवसाय:कार्यालय महानिदेशक लेखापरीक्षा,वैज्ञानिक विभाग,नई दिल्ली में सीनियर ऑडिटर के पद पर 2014 से कार्यरत।
सामाजिक एवं साहित्यिक सहयोग: बेगूसराय में आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को अंग्रेज़ी की मुफ्त कोचिंग। मोहल्ले के बच्चों के कहानी,कविता और पेंटिंग को बढ़ावा देने हेतु स्थानीय पत्रिका”कोशिश” का प्रकाशन और सम्पादन किया। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में विदेशी भाषा में स्नातक की परीक्षा के लिए “Splendid World Informatica” किताब का सह लेखन एवं बच्चों को कोचिंग। बेगूसराय ,बिहार एवं अन्य राज्यों के हिंदी माध्यम के बच्चों के लिए “Remember Complete Dictionary” किताब का अनुवाद। बेगूसराय,बिहार में स्थित अनाथालय में बच्चों को छोटा अनुदान।
बचपन में राजहंस,क्रिकेट वर्ल्ड की प्रतियोगिताओं में इनाम प्राप्त।
शोसल मीडिया पर सामाजिक मुद्दों पर बेबाकी से अपने विचारों को प्रस्तुत करना।
उपलब्द्धियाँ: अमर उजाला काव्य, हिंदुस्तान समाचार पत्र,पटना,सांध्य दर्पण इंदौर,अन्तरशब्दशक्ति इंदौर,परिचय टाइम्स,विजय दर्पण टाइम्स,सरिता,पर्यटन प्रणाम सहित 80 से अधिक पत्रिकाओं,अखबार,ऑन लाइन साइट्स पर कविता,कहानी,लेख,व्यंग प्रकाशित। मातृभाषा के द्वारा प्रकाशित काव्य संग्रह “नवांकुर”में मेरी कविताओं को स्थान प्राप्त। रवीना प्राकाशन ,नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित निभा पत्रिका और मेरी रचना काव्य संग्रह में मेरी कविताएँ शामिल। विश्व पुस्तक मेला के दौरान मेरे काव्य संग्रह”यूँ ही सोचता हुआ” का विमोचन।
अपने कार्यालय में हिंदी दिवस पर आयोजित निबंध लेखन प्रतियोगिता में 3 साल से प्रथम स्थान प्राप्त। आरषी फाउंडेशन,भोपाल के द्वारा विकलांगों पर आयोजिय काव्य प्रतियोगिता में अखिल भारतीय 20वा स्थान जिसका निर्णय गुलज़ार साहब ने किया था। मातृभाषा द्वारा काव्य प्रतियोगिता में तीसरा स्थान जिसके तहत आशीष दलाल का उपन्यास पुरस्कार के रूप में प्राप्त हुआ। दिल्ली में आयोजित कॉमनवेल्थ खेल के दौरान पर्यटन मंत्रालय के द्वारा आयोजित “Earn while you learn” कार्यक्रम का सफल प्रतिभागी।
आगामी 4 किताबों पर काम चालू। यु ट्यूब पर शार्ट फिल्मों में सांग्स और डायलॉग भी लिखी हैं। पश्चिम मध्य रेलवे महालेखा कार्यालय की पत्रिका
साँची में मेरी कविताओं को स्थान प्राप्त। कार्यालय महानिदेशक लेखापरीक्षा,वैज्ञानिक विभाग,कोलकाता शाखा से प्रकाशित पत्रिका में मेरी रचनाओं को स्थान प्राप्त। भारतीय लेखापरीक्षा एवं लेखा विभाग अकादमी ,शिमला द्वारा मेरी फोटोग्राफी के लिए सम्मान पत्र। प्रतियोगिता दर्पण पत्रिका अंग्रेज़ी अंक में डिबेट और निबन्ध प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त। मेरे द्वारा किए गए ड्राइंग की सराहना और पत्रिकाओं में स्थान प्राप्त।
नवोदित लेखकों को प्रोत्साहन एवं उत्साहवर्धन हेतु रचनात्मक साइट्स जैसे काव्य सागर,भारत का खजाना की जानकारी उपलब्ध कराना।
अभी तक तमाम परीक्षाओं में प्राप्त उपलब्धियां भी नीचे हैं।

धन्यवाद

Name- Salil Saroj
Address:
B 302,Signature View Apartments,Mukherjee Nagar,New Delhi
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Employed as Senior Auditor in the Office of Principal Director of Audit, Scientific Departments,AGCR Building, CAG, New Delhi