उतर आता है

चेहरे पर आख़िर उतर आता है।
लाख छिपाओ छिप नहीं पाता है।।

ग़म हो या हो ख़ुशी दोनों मेहमान हैं।
एक आता है तो एक चला जाता है।।

रिश्ते सारे जमीन के हैं यहीं रह जायेंगे।
कोई रिश्ता आसमानों तक नहीं जाता है।।

नज़र बिछाने वाले नज़र आते ही नहीं।
उम्र भर भला साथ क़ौन निभाता है।।

ज़ख़्म देने वाले दूर के होते नहीं अनिल।
शख़्स माहिर है वह पास ही मुस्कुराता है।।

पंडित अनिल
स्वरचित, मौलिक ,अप्रकाशित
अहमदनगर , महाराष्ट्र
📞 ८९६८३६१२११

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