गैरों से दिल लगाना/सुरेश भारद्वाज निराश

ग़ज़ल गैरों से दिल लगाना तू छोड़ दे अपनों से दूर जाना तू छोड़ दे दिल तेरा तो अमानत किसी की है याद रखले भुलाना तू छोड़़ दे चाँद है देखता रोज ही तुम्हें चाँदनी में नहाना तू छोड़ दे तेरी चाहत है मेरी दिवानगी आँखों से मुस्कराना तू छोड़ दे रास्ता ये तेरा है … Continue reading गैरों से दिल लगाना/सुरेश भारद्वाज निराश