जीवन रहस्य/कविता/नंद किशोर परिमल

जीवन रहस्य

मानव जीवन एक रहस्य बड़ा है, अब तक इसको कोई जान न पाया ।
जितना कोई जानना चाहे, उतना ही यह जाए गहराता ।
जीवन यह अबूझ पहेली बड़ी है, व्यथा इसकी बहुत बड़ी है ।
अभी तक इस को कोई जान न पाया, पर्दा रहस्य से उठा न पाया ।
प्रेम, सत्य और अहिंसा के पथ जो चला है, वही इसको कुछ समझ है पाया ।
बाकी सारी बात बेकार है, इसकी महिमा बहुत बड़ी है ।
गौतम बुद्ध सरीखे मानव, जीवन रहस्य को समझने खातिर ।
जिस पथ पर ये बढ़े थे, मार्ग वही इसके रहस्य को सुलझाता ।
पर आम जन के बस की बात नहीं यह, परिमल राह यह आसान नहीं है ।
परिमल राह यह आसान नहीं है ।
नंदकिशोर परिमल, सेवा निवृत्त प्रधानाचार्य
सत्कीर्ति निकेतन, गुलेर, तह,देहरा, जिला, कांगड़ा
हि_प्र, पिन 176033, संपर्क, 9418187358

पहाड़ी ग़ज़ल/डॉ पीयूष गुलेरी


साहित्यकार कभी मरा नही करते अपनी रचनाओं से वो हमेशा संसार को महकाते रहेंगे। माननीय पीयूष गुलेरी जी को शत शत नमन, भारत का खजाना ऑनलाइन ई पत्रिका में पढ़िए उनकी कुछ रचनाएं।

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