हास्य ब्यंग्य रचना/सुरेश भारद्वाज निराश

हास्य ब्यंग्य रचना

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दो पंचबर्षीय योजनाओं में
कठिन परिश्रम के वाद
तृतीय श्रेणी में मैट्रिक पास
पहले के मध्यम और
अब के उच्चत्तम बर्ग से सम्वंधित
पचास बर्षीय, सुन्दर, योग्य,अनुभवी,
वायदा मुकुर, दलबदलू और
पिछले लोकसभा चुनाव में हारे हुए,
उत्साही, जनसेवक,जननायक
भूतपूर्व संसद सदस्य के लिये
भारत के किसी भी
निर्वाचन क्षेत्र से
कम से कम 51 प्रतिशत मत आमन्त्रित हैं
इच्छुक मतदाता
प्रत्याशी से सीधा सम्पर्क करें
विरोधियों से बिलकुल न डरें
और धन्यवाद के लिये
डाक टिकट लगा लिफाफा साथ भेंजें।

आपकी प्रविष्टियाँ आने के बाद ही
प्रत्याशी चुनाव क्षेत्र की घोषणा करेगा
प्रतिशतता कम हुई तो चुनाव
विधान सभा के लिये लड़ेगा।

प्रत्याशी ने पहले ही से कोई मैनीफैस्टो
नहीं बताना है
क्यूँकि आप जानते ही हैं
कि जीतने के बाद हालातानुसार
उसने मुकर जाना है
यदि उसने वादा पूरा कर भी दिया
तो भी समस्या उभरती है
और जनता को देश बचाने के लिये
सरकार बदलनी पड़ती है।
प्रत्याशी का कहना है कि उसने
लगभग सारे दल बदल कर देखे है
हर बार उसके कारण
दल, दलदल में फंस जाता है
और लोकतंत्र जनता को नहीं
सरकार बचाने में लग जाता है।

प्रत्याशी देश को
जो कभी सोने की चिड़िया था
अब हीरे का कौआ बनाना चाहता है
क्यूँकि उसके विचार में
हीरा सोने से मंहगा होता है और
कौए का आकार चिड़िया से बड़ा होता है।
वैसे भी आजा़दी के बाद
देश में कौए ज्यादा हो गये हैं और
चिड़िया के अंडे सदैव के लिये
सांपों के पेट में सो गये है।

प्रत्याशी मानता है
यदि बह जीत गया और मंत्री बन गया
तो देश में क्रांति लायेगा
नेता का न्यूनतम शिक्षा स्त्तर बेरोजगार होगा
और बह रोज़गार कार्यालय से आयेगा
वैसे भी आजकल
राजनीति शास्त्र और संविधान का ज्ञान
नेताओं के पास नहीं
जनता के पास है और
नेताओं का बिषय राजनीति शास्त्र नही
वल्कि इतिहास है
तभी तो नेतागण संसद में बैठकर
प्लासी के युद्ध का बिष्लेश्णात्मक
नाटक करते है और
तोपों और तलवारों की जगह
गालियाँ और जूते चलते हैं।

प्रत्याशी का यह भी कहना है
बह संविधान के दायरे में रह कर
संविधान में पूर्ण बदलाव लायेगा
और जनता की सेवा के लिये
कुर्सी से चिपक जायेगा।
जय हिन्द।

सुरेश भारद्वाज निराश
धर्मशाला हिप्र

पहाड़ी ग़ज़ल/डॉ पीयूष गुलेरी


साहित्यकार कभी मरा नही करते अपनी रचनाओं से वो हमेशा संसार को महकाते रहेंगे। माननीय पीयूष गुलेरी जी को शत शत नमन, भारत का खजाना ऑनलाइन ई पत्रिका में पढ़िए उनकी कुछ रचनाएं।

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