जीने के अंदाज़ सब के अलग/राम भगत नेगी

जीने के अंदाज़ सब के अलग है!

जीने का अंदाज़ सबके अलग है
कुछ लोग माँ बाप के छ्तर छाया मै!
कुछ लोग माँ बाप क आशीर्वाद मै!
जीते है!

कुछ लोग देश के मान सम्मान क लिए!
कुछ लोग देश को बेच कर जीते है!
जीने के अंदाज़ सब के अलग है!

कुछ लोग गौ माँ की पूजा कर!
कुछ गौ माँ की हत्या कर!
जीते है!
कुछ लोग गंगा माँ की सेवा कर!
कुछ लोग गंगा माँ को गंदगी कर!
जीते है!
जीने के अंदाज़ सब के अलग है!

कुछ लोग पावन हिमालय को तोड़ कर!
कुछ लोग हरियाली खुशहाली को जोड़ कर!
कुछ लोग मज़दूर ओर किसानो का खून चूस कर!
कुछ लोग भ्रष्टाचार आंतक वाद से लड़ कर!

कुछ लोग मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा जा कर!
कुछ लोग फुटपाथ के ग़रीबों के सेवा कर!
जीने के अंदाज़ सब के अलग है!

आओ मिल कर एक नई सोच बनाए!
जीने के अंदाज को हम बदल कर!
एक न्या भारत बनाए

राम भगत नेगी

महक रोटी की

महक रोटी की खत्म हो रही है
बर्गर ब्रेड पिजा ने अब जगह ली है

समय किस के पास आज रोटी बनाने
सब आज खा रहे है चाइनीज खाने

नानी के रोटी और दादी के रोटी
आज के बच्चों को लगती है मोटी मोटी

माँ आज टीवी फोन में व्यस्त
पापा दोस्तों संग पार्टी में व्यस्त

चूल्हे से हम गैस में आ गये
रोटी अब बोलो कौन बनायें

बासमती की सुगंध बहुत भीनी भीनी
देखो आज कैसे सुगंध ने रोटी छीनी

जौ मकई गेहूँ की रोटी
सेहत के लिये बहुत अच्छी होती

आज फास्ट फूड ने सब की है खत्म
जिसे खाने से होता नहीं ठीक से हजम

मेगी नूडल्स मोमो और चोउमीन
खत्म कर रहे है हमारे हार्ट बिन

महक रोटी की खत्म हो रही है
बर्गर ब्रेड पिजा ने अब जगह ली है

मौलिक अप्रकाशित
राम भगत किन्नौर
9816832143

किस को सुनाऊं दिल की बात

किस को सुनाऊं
मैं अपनी दिल की बात

कटती नहीं है
उसके बिना दिन और रात

किस को अपना दास्तान सुनाऊं
कैसे उसे फिर से मनाऊँ

कैसे बीत रहे है दिन मेरे
अधूरा हूँ मैं बिन तेरे

मैंने कभी सोचा ही नहीं
बिन तेरे कैसे जिऊगा

मैंने कभी सोचा नही
दर्द दिल की कैसे सहूगा

क्या होगा कब होगा
कुछ पता नहीं

तेरे संग आज तक
जो जिंदगी बीता दी

ये शोख़िया मैरी अब
उतर गई है

तेरी याद में अब
सांसे अटक गई है

मैंने सोचा ही नहीं
कैसे अब तेरे बिना जी पाऊंगा

किस को सुनाऊं
मैं अपनी दिल की बात

मौलिक अप्रकाशित
राम भगत किन्नौर
9816832143

कोर्ट कचहरी

चुल्म कर लो
सजा सालों तक नहीं

मुजरिम बैल के लिये तरसे
कानून तो कानून है सब पर एक जैसे बरसे

जी हाँ कानून तो कानून है
बच्चा हो या जवान और बुढ़ा

हमें कानून का सम्मान करना चाहिये
सादा सत्य का पालन करना चाहिये

कोर्ट कचहरी से हमें दूर रहना हो तो
गलत कार्य और गलत लोगों से दूर रहे

राम भगत मौलिक अप्रकाशित
राम भगत किन्नौर

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