चरित्र और चित्र/राम भगत नेगी

चरित्र और चित्र

कौन इंसान कैसा है
चित्र और चरित्र कैसा है
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हम समझ नहीं सकते
देख नहीं सकते आज के भीड़ में
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हम खुद आज भीड़ खोए है
जाग कर भी हम सोए है
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प्यार मुहब्बत के जाल में
धोखे फरेब के जाल में
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जब हम सोए है खुद में खोए है
तो कैसे चरित्र और चित्र को पता चलेगा
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यहां दिखावा और छलावा बहुत है
कोई कितना भी करीब रहा हो
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वक्त आने पर अब आप कौन
बात करना तो दूर आपको देखता तक नहीं
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कौन इंसान कैसा है
चित्र और चरित्र कैसा
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हम …..
देख …
***
मौलिक अप्रकाशित
राम भगत किन्नौर
9816832143
9418232143

बदलने लगे है

बदलने लगे है
अब नाम शहरों के
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हो रहे है चर्चे आम
अब शहरों के
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काश बदलती कु़छ
विकास की तस्वीर
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मजदूर किसानो की
किस्मत की लकीर
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तो मैरा मन खुशी से
बाग बग होता
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नाम बदलना विकास नहीं
काम बदलना विकास है
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भ्रष्टचार बेरोजगारी भुखमरी से
आज भी देश पिछड़ रहा है
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हम बस विकास पर
नाम बदल रहे नोट बदल रहे है

***
मौलिक अप्रकाशित
राम भगत किन्नौर

आज का चांद खास हो
आज का चांद खास हो
विनम्र और शांत हो
***
दूरियां मिट जाये
प्रणय में बंद जाये
***
सबको अपना प्यार
मिल जाये
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कोई रुठा हो तो मान जाये
सुहाग की सिंदूर माथे में सज जाये
***
आज का चाँद खास हो
विनम्र और शांत हो

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