कभी कभी हम/राम भगत नेगी

कभी कभी

कभी कभी हम
बहुत आगे बड़ते है
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और हम पीछे बहुत
कुछ छोड़ जाते है
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रह जाती है पीछे समय अपनापन
और बहुत सारी यादें
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आगे बढ़ना भी
अपनी चाहत थी
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पीछे छूट गये जो
साथ चलने की चाहत थी
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जो छूट जाते है पीछे वो
अपनों को नहीं भूल पाते
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जो आगे बड़ते है अपनों को
छोड़ कर वे बहुत कु़छ खो देते है
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मौलिक अप्रकाशित
राम भगत किन्नौर
9816832143

फूलों की खुशबू

फूलों की खुशबू से कुछ सीखो
कितनी भी बारिश हो या तपती धूप
फिर भी देते ये रोज खुशबू
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फूल कभी भी अपना रंग नहीं बदलता
हर मौसम में फूल एक जैसा ही रहता
रंग कैसा भी हो
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फूल कभी बागवान के चरणों में
कभी मंत्रियो के गले में तो कभी इंसान के अर्थी में
देते फिर भी ये बराबर खुशबू
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फूलों में कोई भेद भाव नहीं
अमीर गरीब देवता भगवान हरिजन राजपूत
अच्छे बुरे वक्त में पड़ते सबके गले में
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फूलों में कोई अंहकार नहीं
कोई अभिमान नहीं मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा और चर्च
सभी जगह देते ये बराबर खुशबू
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फूलों का मुरझाना भी वास्तविक सत्य है
ये जीवन जन्म मरण का चक्कर है
तो क्यों आज इंसान में
अभिमान और अहंकार का गुमान है
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मौलिक अप्रकाशित
राम भगत किन्नौर
9816832143

समझना मुश्किल है

!……………

मन की बाते किसी का भी हो
समझना मुश्किल है
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हवाओं का रुख़ कब किस तरफ हो जाये
समझना मुश्किल है
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मौसम का रुख़ कब कैसा हो
समझना मुश्किल है
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सूरज कब बादल से डक जाये
समझना मुश्किल है
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कौन कब किस के कदमों में गिर जाये
समझना मुश्किल है
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कब किस की अर्थी सझे
कब किस की डॉली समझना मुश्किल है
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माया के इस माया नगरी में
सभी माया जाल में फंसे है
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इस माया नगरी में कौन अपना कौन पराया
समझना मुश्किल है
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मौलिक अप्रकाशित
राम भगत किन्नौर
9816832143

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