रखवाले हैं

सिर की है परवाह नहीं हम तो बस मतवाले हैं।
भारत माँ की बलि वेदी पर शीष चढाने वाले हैं।।
ग़द्दारों में कैसा दम खम केवल वे दिल काले हैं।
सिर की • • •

शेरे हिंद हैं हमें वतन की शाख़ दुलारी प्यारी है।
सिवा वतन के और नहीं अपनी किसीसे यारी है।।
दुश्मनों के दिल मे घुस कोहराम मचाने वाले हैं
सिर की • • • •

सरहद छू ले आकर दुश्मन,हम निग़हेबानी में हैं।
जितने तोप असलहे उसके, उतने यहाँ जवानी में हैं।।
हम पत्थर के सीने पर भी घास उगाने वाले हैं।
सिर की • • • •

वतनपरस्ती हमको अपनी जान से बढ़कर प्यारी है।
हिंदुस्तान हमारा ये धरती मात हमारी है।।
हम भारत के बीर बाँकुरे कंण कंण के रखवाले हैं।
सिर की • • • •

पंडित अनिल