हे भारत भू शत-शत वंदन/निशा कान्त द्विवेदी

‘हे भारत भू शत-शत वंदन’

हे भारत भू शत-शत वंदन
हे वीर तुम्हारा अभिनंदन।
यह देश तुम्हीं से सुरभित है
तू है भारत का शुभ चन्दन।।
है वीरभोग्या वसुंधरा
वीरों से ही रक्षित होती।
अगणित वीरों के शीश चढ़े
प्राणों के बिंधते हैं मोती ।
तेरे शोणित से हो सिंचित
यह भारत दिखता है नन्दन।
हे भारत भू ०……………..

घर द्वार तुम्हारा भी होगा
परिजन से मिलन की चाहत भी।
संतति भी राह तके होंगे
बूढ़ी आंखें तरसायी भी।
एक देवी सदृशा तपोनिष्ठ
नारी घर में हुलसायी भी।
हिय में समेट इन स्मृतियों को
आंखें तेरी भर आईं भी।
पर राष्ट्र मान सम्मान के हित
तेरे हिय में होता स्पंदन ।
हे भारत भू ०………………….

होली, दीवाली, ईद तथा
हर तीज और त्योहारों पर।
तू घर से रहकर दूर सदा
दुर्गम ,मुश्किल सीमाओं पर।
इन त्योहारों की रौनक की
परिभाषा हमें बताता है।
सैनिक सीमा पर जलता है
तब देश रोशनी पाता है ।
तेरे ही त्याग, समर्पण से
खुशियां छाती हैं घर आंगन।
हे भारत भू ०………………

भारत की मिट्टी का कण-कण
तेरा ही गौरव गान करे।
तेरे ही शौर्य पराक्रम पर
यह देश सदा अभिमान करे।
निज प्राणों को करके अर्पित
जो चिर निद्रा में चले गए ।
उनके सौरभ से वासित हो
यह भारत उनका नमन करे।
हे वीर प्रसविनी भारत भू
अभिमान तेरे हैं ये नन्दन ।
हे भारत भू ०……………..

—— निशा कान्त द्विवेदी

आओ विजय दिवस मनाते/विजय भरत दीक्षित

547 जवानों ने पिया था कारगिल युद्ध मे शहादत का जाम/आशीष बहल

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *