उम्मीद💐

आज हरजीत चर्चा में है
बह भी गाँव का आदमी है
निहत्था है, असहाय है
फिर भी अपनी मैहनत से
अपनी लगन से
ऊपर बहुत ऊपर पहुँच गया है
जहाँ हबा बहुत कम है
किश्तों में साँस ले रहा है
जमीन पर नज़र टिकाय
देख रहा है सबकी ओर
एक आस के साथ
शायद लोग उसे हवा के
कम दवाब से बाहर निकालें
उसे आगे बढ़ने का हक दें
हवा के कम दवाब को कम करें
उसके चारों ओर इतनी हवा
इक्ट्टठी कर दें कि बह
आगे ही आगे बढ़ता जाये
हमारे लिये, देश के लिये।
पर आज के दौर में
कौन पूछता है किसी को
कहाँ दिखती है हमें
किसी की उम्मीदें
कौन बनता है सहायक
किसी की सफलता में
हमें तो अपने से मतलव है
अपनी इच्छाओं से मतलव है
अपनी सफलताओं से मतलव है।
कौन जानता है किसी हरजीत को
उसकी समस्याओं को।
उसकी मंजिल को।

सुरेश भारद्वाज निराश🎂।
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