चलती जाती ज़िंदगी”
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जन्म से मौत तक,
व्यस्त रहती ज़िंदगी,
अपनी दास्ताँ ख़ुद
कहती ज़िंदगी .. !

रोज़ उठते गिरते
सब सहती ज़िंदगी’
सदा उलझनों में
रहती ज़िंदगी ..!

हर तूफ़ान ठोकर,
सहती ज़िंदगी ..
कुछ लेती कुछ
देती ज़िंदगी .!

जीवन रस धारा में
बहती ज़िंदगी ..
सुख दुख में
रहती ज़िंदगी..
हर दर्द सहती ज़िंदगी …!

चलती फिरती रहती ज़िंदगी
अच्छाई बुराई लेती ज़िंदगी
हंँसती रोती रहती ज़िंदगी ..!

रात दिन कमाती ज़िंदगी
ख़ुशहाल क्यूँ नहीं
होती ज़िंदगी..!

कुछ न ले पाती
ज़िंदगी ..
सब छोड़ चली
जाती ज़िंदगी ..!!

उत्तम सूर्यवंशी
तलाई किहार
चंबा हिमाचल
मो.न. 8629082280