हे विश्वगुरू गीतागायक,सद्नमन मेरा स्वीकार करो।
हे भुवन मोहिनी भव मोहन,पुनि गीता स्वर गुंजार करो।।
गोपालक हे अब गाय तुम्हारी,भटक रही हर कोने पर।
हे करुणाकर हे दया सिन्धु,गौ माता का उद्धार करो।
हैं दीन हीन अबला बनकर,तेरी गौवें विचरें भू पर।
हैं तरस रही तृण हरित आज, कुछ तो करना केशव विचार।।
सुनना मेरी प्रभुवर पुकार,देती निश्छल ये दुग्धधार।
गौ माँ की पीड़ा दूर करो,दो इनका भी जीवन सँवार।।
Dr. Meena kumari
Gonda. U. P.