1.

शहीदों की शान निराली होती है।

मेरे वतन की मिटटी में लहू की महक कैसे होती है, क्यों मिलती नही किसी को जमीं ए वतन और परिंदों की मलकियत सारे आस्मां पे होती है, कौन है जो लौट के घर नहीं आया, क्यों दरवाजे पे आज भी दीदार ए नज़र होती है

ए खुदा बता मुझे वतन पर कुर्बान होने वालों की जिद क्या होती है, क्यों फितरत इनकी हर वक्त मतवाली होती है , हैरान होगा ए खुदा तू भी जान कर , मेरे देश के इन सपूतों की तो शान निराली होती है, मेरे देश के इन सपूतों की तो शान निराली होती है,

लिपट कर तिरंगे में बड़ी शान से आते है, हर वक्त हथेली पे इनके जान होती है, होते होंगे वतन को बेचने वाले चन्द “जयचन्द”, मेरे सैनिक से तो देश की ऊँची शान होती है, देश के सपूतों की तो सरहद पर ईद और दिवाली होती है, मेरे देश के वीरों की शान निराली होती है, मेरे देश के वीरों की शान निराली होती है।

कह दो हवाओं से कि पैगाम उन तक पँहुचा देना , देश के गद्दारो को जरा समझा देना हर बार नहीं क्षमा यंहा स्वीकार होती है,
कोशिश चाहे लाख कर ले हिंदुस्तान की हस्ती न कभी खाक होती है, बन हिमालय खड़ा सिपाही इसी से तो तिरंगे की पहचान होती है, मेरे देश के सैनिक की तो सरहद पर ईद और दिवाली होती है, मेरे देश के वीरों की शान निराली होती है, मेरे देश के वीरों की शान निराली होती है।

खड़े सरहद पर हर दम, हर वक्त मौत सर पर सवार रहती है , मोत से ही दिल्लगी वतन से ही मोहब्बत होती है ,ऐसे वीरो से तो वतन की आबरु वतन की आन होती है, ऐसी अज़ब दास्ताँ अज़ब ये कहानी होती है, देश के वीरों की शान निराली होती है देश के वीरों की शान निराली होती है।
आशीष बहल
जे बी टी अध्यापक
चुवाड़ी जिला चम्बा
हि प्र
9736296410

2.

सैनिक की पुकार

सुनो सैनिक की वीरता सुनाने आया हूँ, दर्द की मैं इक गाथा कहने आया हूँ। लहू से लथपथ एक सैनिक जब भारत माता को पुकारे वो करुणा बतलाने आया हूँ वीर सैनिक कहता है……
माँ, माँ दर्द से बेहाल मैं बेजान सा हुआ जाता हूँ भर ले अपने आँचल में, मैं लड़खड़ा सा जाता हूँ। चीर कर देह मेरी, दुश्मन ने हैवानियत का वो खेल खेला है क्या बताऊँ माँ,
बन हिमालय सरहद पर हर घाव मैंने झेला है, हिमाकत दुश्मन की जो मुझे ललकारा है, मैंने घर में घुस कर उसको मारा है। हे माँ मैंने दिन रात अपने लहू से तुझे संवारा है,
थका नहीं,हारा नहीं हर पल गुणगान माँ भारती का गाया है, कमाए होंगे किसी ने नोट ,वोट। मैंने तो भारत माँ के आगे ही शीश झुकाया है,
ले ले छांव में अपनी, अपने आँचल में मुझको छिपा लेना, टूटती इस देह को अपनी ममता से भर देना, बन सैनिक हर बार मैं कुर्बान माँ तुझ पर हो जाऊं, बस रोते बिलखते माँ- बाप को तू संभाल लेना।
खड़ी जो हो मेरे इंतजार में प्राण प्यारी चुपके से उसके कान में नाम मेरा ले आना। ढूंढती बहन की आँखों में मेरी तस्वीर छोड़ आना। फौलाद से मेरे भाई के कंधों को तुम साहला आना। पूछे जो कोई पता मेरा प्यारा सा तिरंगा लहरा आना।
बस फरियाद सैनिक की हर भारतवासी सुन लेना
माँ के दामन को दागदार न होने देना,
कहता है ‘आशीष’ वास्ता सैनिक का खुदगर्ज दुनिया में कभी भारत माँ को न बेच देना, खुदगर्ज दुनिया में कभी भारत माँ को न बेच देना।
आशीष बहल
चुवाड़ी जिला चम्बा
Jbt अध्यापक
Ph 9736296410

3.

ना’पाक’ हरकत

सरहद पर हर बार तूने पाप किया,
काम हर बार तूने ना’पाक’ किया।
नेकी हमारी जो हर बार माफ़ किया
पर नहीं क्षमा याचना अब बस रण होगा
मिटा कर तेरा वजूद हे पाकिस्तान
पूरा हर सैनिक का ये प्रण होगा।
बिगड़ेंगे जिस दिन भक्त महाकाल के
बस धरती ना’पाक’ पर हर तरफ सर-मुंड होगा
न तू होगा न तेरा नामों निशां होगा
बस हर तरफ शेरे हिंदुस्तान होगा
क्या बात करता है तू कश्मीर की
फ़िक्र कर तू इस्लामाबाद की
बिगड़ गए जिस दिन भक्त महाकाल के
उस दिन भयानक ये मंजर होगा
पाकिस्तान में सिर्फ लाशों का समंदर होगा
न तू होगा न तेरा नामों निशा होगा
कराची में लहराता प्यारा ये तिरंगा होगा
मेरे देश के वीरो का सपना ये साकार होगा
कश्मीर तो अपना है इस्लामाबाद भी हमारा होगा।
आशीष बहल
चुवाड़ी जिला चम्बा