धन्य धन्य है भारत की सेना

वाह मेरे भारत की सेना, तुझ पर भारत माता को है बड़ा ही मान ।
पूरे विश्व में नंबर एक पर है भारत की सेना, दूसरा जग में न कोई तुम्हारे समान ।
लाख लाख तुझे नमन हम करते, लगता ज्यों करते मात्र इकाई समान ।
भारत वर्ष को गर्व है तुझ पर, शब्दों में नहीं हो सकता इसका व्याख्यान ।
दुश्मन को उसके घर में घुसकर मारे, तिरंगा फहरा कर गाकर आए राष्ट्रीय गान ।
वाह मेरे भारत की सेना, तुझ पर भारत माता को है बड़ा ही मान ।
आज कृतज्ञ राष्ट्र आभारी बहुत है, तुम्हारे तीनों अंगों को करता शत शत प्रणाम ।
यश तुम्हारा पूरा विश्व है गाता, थकता नहीं गाता सदा तुम्हारा ही यशगान ।
तुम्हारे शौर्य की वीरगाथा पूरे जग में गूंजे, भारतवासियों का तुझे है शत शत प्रणाम ।
विश्व ने शौर्य अपनी आंखों से देखा, जो तुमने दिया अपनी वीरता का प्रमाण ।
चालीस के बदले चार सौ मारकर, बदला उसके घर में घुसकर, बढ़ाया तूने अपना मान ।
वाह मेरे भारत की बहादुर सेना, भारत माता को है तुझ पर मान ।
शत्रु आंख टेढ़ी कर न देखे, वर्ना आंख फोड़ कर लेंगे, घर में घुसकर उसके प्राण ।
भारत माता की जय जय बोले, गुण गाता है तेरे हर सू पूरा विश्व जहान ।
हर नागरिक को तुम पर गर्व बड़ा है, नाज है तुम पर करता, आज यह पूरा हिंदुस्तान ।
इससे जो टकराएगा , चूर चूर हो जाएगा, शब्द सिर्फ यही है बोले, सेना का हर इक वीर जवान ।
शत्रु के टुकड़े टुकड़े करना खूब यह जाने, जीतकर भू को वापस करती, तभी कहलाती वीर महान ।
इसके शौर्य को कोई कम कर न आंके, सेना यह आम नहीं है, विश्व है गाता इसके गुण गान ।
धन्य धन्य है भारत की सेना, जय जय करता आज तुम्हारी विश्व का हर इन्सान ।
परिमल को मान बड़ा है तुझ पर, गर्व करता है तुझ पर पूरा मेरा हिंदुस्तान ।
गर्व करता है तुझ पर पूरा मेरा हिंदुस्तान ।


नंदकिशोर परिमल, सेवा निवृत्त प्रधानाचार्य
सत्कीर्ति निकेतन, गुलेर , तह. देहरा, जिला. कांगड��