यूं ही ख्याल आया कि काश. . सड़क पर पड़े वो दो छोटे पत्थर मैं और तुम होते. .
दुनिया जहान से अनजान मेरा हर पल तुझ में शामिल. .. कोई कष्ट कोई संकट मुझे न डगमगाता ,तुम जो साथ हो..

दुआ है जब भी उठे धरती के आगोश से..
हम एक साथ उठे..
फिर हथौड़ी की चोट मुझे दर्द ना देती…
तुम जो हमसाया हो
कंकड़ बन फिर साथी बनते किसी दीवार में. …
या मिट्टी बन समा जाते एक दूसरे में.. .
पर तुझसे जुदाई गवारा नहीं. .

यूं ही ख्याल आया कि काश.. .