कविता
जीवन छोटा सा एक सफर,बन जाओ दीपक तेज प्रखर।
बन प्रीति बसो सबके मन में,जाये जीवन सबका ही सँवर।।
गृह ग्राम सजे भू धाम बने,भारत प्यारा अभिराम बने।
बादल बरसाओ ऐसा जल,श्रमदेव धरा के ललाम बने।।
अपना या पराया भेद मिटे,अमीर गरीब का द्वेष हटे।
सागर करुणा का बरसाओ,समरसता से सब घाव पटे।।
Dr. Meena kaushal
U. P.
Gonda
Sent from Bhara