मुस्कुराना आ गया/पंडित अनिल

मुस्कुराना आ गया 😊

देखिये लब को हमारे, मुस्कुराना आ गया।
देखिये पलकों को भी,आँसू छुपाना आ गया।।

कीजिये जी भर सितम,उफ़ नहीं लायेंगे हम।
देखिये दिल को भी ग़म में,ग़ुनग़ुनाना आ गया।।

याद दिल में है बसी,तुम्हारी तो मैं तनहां कहाँ।
देखिये यादों से भी,अब दिल लगाना आ गया।।

और होंगे वो जो रोयेंगें,इशक़ में बेवजह।
देखिये हर शै से भी नज़रें,मिलाना आ गया।।

इश्क़ मेरा है नहीं,अहबाब सा जो उड़ चले।
दोपहर की धूप में भी, खिलखिलाना आ गया।।

तूफ़ान-ए-हवादिस,अब क्या डरायेगा मुझे।
देखिये तुफ़ां मे भी,शम्माँ जलाना आ गया।।

हूँ बहुत वाक़िफ़,जमाने के फ़रेबों से अनिल।
मुझको भी तेरी तरह,बातें बनाना आ गया।।

पं अनिल
अहमदनगर महाराष्ट्र

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