*कच्चे धागे का बन्धन*

बहना ने भाई की कलाई को सजाई है।
सजी धजी है बहना, खूब देती बधाई है।।

मुस्कराते रहना भाई,देती यही दुहाई है।
दुश्मन से लाज बचाना, कहती यही आई है।।

ऊँचे अरमानों ने मेरे ,ली कैसी अंगड़ाई है।
जब जब राखी आती, फूली नहीं समाई है।।

छोटी छोटी कमियाँ भी,भैय्या को सुनाई है।
पवित्र रिश्ते की ये नींव,संस्कारों ने बनाई है।।

भाई बहन ने मेहनत से शिक्षा की जोत जलाई है।
गाँव गाँव और ढाणी ढाणी नई रोशनी आई है।।

मौलिक,स्वरचित,अप्रकाशित

डॉ. राजेश कुमार शर्मा”पुरोहित”
भवानीमंडी
जिला झालावाड़
राजस्थान