आओ आज़ादी का जश्न मनाते हैं/आशीष बहल

जश्ने आज़ादी

आओ आज़ादी का जश्न मनाते हैं, भूले ना हम कुर्बानी ये कसम हम खाते हैं,
आज़ादी यूँ ही नही मिली थी, कई गयी थी जानें, कई वीरों ने शहादत पाई थी,
मुगलों से अंग्रेजो तक हमने आज़ादी की कीमत चुकाई थी,
आज के आज़ाद भारत की तब ये तस्वीर बनाई थी,
आज़ादी यूँ ही नही मिली, आज़ादी की कीमत हमने चुकाई थी।
देश के वीरो ने अपनी जान की बाजी लगाई थी, तब जाकर मेरे देश मे आज़ादी की किरण आयी थी ।।
फिर क्यों तुम भूल गए उन वीरों को, भारत के उन हीरों को
चूम लिया फंदा जिन्होंने भगत सिंह जैसे शेरों को,
भूल गए झांसी के अदम्य साहस वाली उस रानी को,
भूल गए तुम शिवाजी जैसी शमशीरों को,
याद करो जरा खून से लिखी वीरो की कहानी को,

भूल गए तुम आज़ाद हिंद फौज के वीर जवानों को,
क्यों भूल गए तुम अहिंसा के पुजारी बापू के नारों को,
क्यों भूल गए तुम भारत के वेदों की वाणी को,
याद करो जरा आज़ादी के उन परवानों को, चूम लिए थे फंदे हंसते हंसते ऐसे युवा वीर जवानों को,
डोल गए थे सिंहासन मुगलो और अंग्रेजों के, दहाड़े थे जब सिंह महाराणो के,
दे दी कुर्बानी देश की खातिर ऐसे वीरों को नमन करते हैं
सच कहता हूँ दोस्तो आज़ादी यूँ ही नही मिली थी, आज़ादी की कीमत हमने चुकाई थी, आज़ादी की कीमत हमने चुकाई थी।
जय हिंद
आशीष बहल
चुवाड़ी जिला चम्बा।

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