माननीय पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयन्ती पर सादर…
*अटल तुम्हारा अंदाज़ रहेगा*

पग पगान्तर युग युगान्तर
सबको तुम पर नाज़ रहेगा
उज्जवल था कल सबका तुमसे
उज्जवल सबका आज रहेगा
पग पगान्तर युग युगान्तर
सबको तुम पर नाज़ रहेगा

खिलेंगी कलियाँ गुलशन गुलशन
गायेंगे भंवरे तेरी गुंँजन
अमिट रहेगी महक तुम्हारी
तू फूलों में पराग रहेगा

भीत्तरघात मिटाये तुमने
वाह्य आक्रमण बचाये तुमने
विश्व में है नाम तुम्हारा
तू विश्व सरताज रहेगा

तेरी कलम से बहती कविता
कल कल करती ज्यूँ हो सरिता
शव्दों में हैं सात समंन्दर
सोच में तेरी समाज रहेगा

हे युग पुरुष ! हे प्रबुद्ध ज्ञानी
नहीं है कोई तेरा सानी
विश्व सारा नतमस्तक है
दिलों पे तेरा राज रहेगा

जीत तुम्हारी जय तुम्हारी
गीत तुम्हारे लय तुम्हारी
सात सुरों के संगम में
बीणा सा तू साज़ रहेगा

मौसम बदलेंगे बयार बदलेगी
दिन बदलेंगे बहार बदलेगी
परिवर्तनशील समय परिधि में
तू सदैव ऋतुराज रहेगा

लगता है तुम अपने हो
कोई सुहाने सपने हो
सुवह की लाली तुमसे है
तुमसे दिन का आगाज़ रहेगा

हे देव धरा के तुम देवता हो
भारतवर्ष की अखंड एकता हो
अटल हो तुम “अटल” रहोगे
अटल तुम्हारा अंदाज रहेगा
पग पगान्तर युग युगान्तर
सबको तुम पर नाज रहेगा
उज्जवल था कल सबका तुमसे
उज्जवल सबका आज रहेगा

सुरेश भारद्वाज निराश
धर्मशाला हिप्र